पुलिस के अनुसार छांयसा गांव निवासी रूपचंद की 50 वर्षीय पत्नी बिमला का शुक्रवार को दिल की बीमारी के चलते अचानक निधन हो गया था। जिस पर परिवार के लोगों ने शाम करीब 5 बजे बिमला के शव का यमुना किनारे पर बने श्मशान घाट में विधि विधान से अंतिम संस्कार कर दिया। थोड़ी देर वहां पर रूकने के बाद सभी लोग घर पर आ गए। रूपचंद का कहना है कि करीब 2 घंटे बाद उनका बेटा जगदीश और एक रिश्तेदार शाहजहांपुर गांव निवासी हरिचंद चिता को देखने के लिए गए थे।
आरोप है कि वहां पर जगदीश और हरिचंद ने देखा कि साधुवेश धारी 3 तांत्रिक बिमला की जलती चिता पर छेड़खानी कर रहे थे। तीनों ने बिमला की खोपड़ी को बाहर निकाला हुआ था और उसके ऊपर मिट्टी की मटकी में चावल व गुड को पकाया जा रहा था। जिस पर जगदीश और हरिचंद ने शोर मचा दिया। शोर मचाए जाने पर तीनों तांत्रिक धमकी देते हुए भागने लगे, मगर तब तक गांव के अन्य लोग पहुंच गए।
ग्रामीणों ने तीनों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। पूछताछ पर पता चला कि आरोपियों में तांत्रिक सुरजन नाथ करीब 15 साल से अटाली गांव के धार्मिक स्थल पर रहता है, जबकि वीरनाथ भी छांयसा गांव के ही धार्मिक स्थल पर काफी समय से रहता है। तीसरा आरोपी भारत करीब 15 दिन पहले ही छांयसा गांव में वीरनाथ के पास रह रहा है।
जांच अधिकारी एएसआई नरेंद्र कुमार ने बताया कि तीनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर तांत्रिक प्रक्रिया में अपनाई जा रही मटकी, चावल व गुड को कब्जे में ले लिया गया। तीनों को शनिवार को कोर्ट में पेश कर दिया। कोर्ट ने उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
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