Saturday, 7 November 2020

शादी के कार्ड में वर-वधु के नाम के आगे क्यों लिखा जाता है चिरंजीव और आयुष्मती, जानिए वजह

आजकल शादियों का सीजन चल रहा है। इस दौरान हमें कई अजीब चीजें देखने को मिलती है लेकिन हम अनदेखा कर देते है। अक्सर देखा होगा कि शादी के कार्ड में वर यानी लड़के के नाम के आगे चिरंजीव लिखा होता है और वधु यानी लड़की के नाम के सामने आयुष्मती लिखा होता है। लेकिन आपने कभी सोचा है ऐसा क्यों लिखा जाता है। 

क्यों लिखा जाता है चिरंजीव

एक कथा के अनुसार एक ब्राह्मण की कोई संतान नहीं थी इसलिए उसने महामाया की तपस्या की और माताजी ने प्रसन्न होकर ब्राह्मण को पुत्र का वरदान दिया लेकिन उन्होंने साथ ही यह बताया कि वह पुत्र अल्पायु होगा। ब्राह्मण की पत्नी  हमेशा अपने बेटे के प्राण को बचाने की प्रार्थना करती थी। 

काशी के एक सेठ ने अपनी बेटी का विवाह उस ब्राह्मण पुत्र के साथ कर दिया। विवाह के बाद पति-पत्नी के मिलन की रात के साथ ही इस ब्राह्मण पुत्र की मृत्यु की रात थी। यमराज नाग का रुप धारण करके उसके प्राण हरने के लिए आए और उसे डस लिया।

ब्राह्मण पुत्र की नव विवाहिता ने फौरन उस नाग को पकड़ के कमंडल में बंद कर दिया। माता को तथा दुल्हन के सतीत्व को प्रणाम करते हुए यमराज ने उस दुल्हन के पति के प्राण वापस लौटा दिए और उसे चिरंजीवी होने का वरदान देने के साथ ही उसे चिरंजीव कहके पुकारा। 

क्यों लिखा जाता है आयुष्मती

एक कथा के अनुसार राजा आकाश धर की कोई संतान नहीं थी। जिसपर नारद जी ने राजा से कहा कि सोने के हल से धरती का दोहन कर उस भूमि पर यज्ञ करने से आपको संतान अवश्य प्राप्त होगी। नारद के कहने के अनुसार राजा आकाश ने सोने के हल से पृथ्वी का दोहन किया और उसी समय उन्हें भूमि से एक कन्या प्राप्त हुई।

महल में पहुंचते ही राजा देखते हैं कि वहां एक शेर खड़ा है जो कन्या को खाना चाहता है. डर के मारे राजा के हाथों से वो कन्या छूट गई जिसे शेर ने अपने मुख में धर लिया। कन्या को मुख में धरते ही वो शेर कमल के फूल में बदल गया।

उसी समय वहां विष्णु भगवान प्रकट हुए और कमल को अपने हाथ से स्पर्श किया। विष्णु के हाथों का स्पर्श पाते ही वो कमल का फूल यमराज बनकर प्रकट हुआ। देखते ही देखते वो कन्या 25 साल की हो गई और यमराज ने उसे आयुष्मती कहकर पुकारा। 



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