Tuesday, 13 February 2018

रेलवे लाया चूहे मारने की 29 करोड़ की मशीन !


इन दिनों रेलवे चूहों के बिल ढूंढ रहा है। मगर अचरच चूहे खोजना नहीं अचरच है वो मशीन जो इस काम को कर रही है। दरअसल, रेलवे ग्रांउड पेंट्रीएशन रडार (जीपीआर) तकनीक के जरिये पटरी के नीचे बने चूहों, खरगोश जैसे छोटे जीवों के बिल खोज रहा है। इस बिलो में बरसात का पानी भर जाने से जमीं खिसकने के चांस बढ़ जाते है और इस कारण बेहद खतरनाक दुर्घटना होने की सम्भावना प्रबल रहती है।


# 29 करोड़ रुपये की है रडार मशीन :

एक रेलवे अधिकारी के मुताबिक, 29 करोड़ रुपये की कीमत वाली ये रडार मशीन प्रतिदिन 160 किलोमीटर ट्रैक का सर्वे कर सकती है। सर्वे के दौरान यह रडार ट्रैक पर गिटि्टयों को भी संतुलित करते हुए जमीन के नीचे सुरंगों और बिलों को स्कैन करती है। स्कैन करने के बाद रडार मशीन विभाग को एरिया, लोकेशन की जानकारी देती है। फिलहाल रेलवे के पास 16 रडार हैं, जिनके जरिये नॉर्दन रेलवे में सर्वे कराया जा रहा है।


# चूहों के कारण रेलवे को होता है प्रतिवर्ष करोडो का नुकसान :

नॉर्दर्न रेलवे के सीपीआरओ नितिन चौधरी ने और बताया कि चूहों के बिल के कारण रेलवे हर साल करोड़ों का नुकसान उठाता है। इसके पहले चूहों को मारने के लिए रेलवे ने भटिंडा, लखनऊ समेत अलग-अलग मंडलों में लाखों रुपये के टेंडर दे रखे थे।


# चूहों के बिल बनते है दुर्घटना का कारण :

चूहे तो मार दिए जाते है लेकिन उनके बिल के कारण दुर्घटनाएं होती रहीं। इसलिए रडार सिस्टम रेलवे ने खरीदा है। यह पटरी के नीचे तक के बिल की जानकारी दे देता है। इसे बिल बुझाने में काफी मदद होती है। बहरहाल मशीन की कीमत सुनकर हर किसी की आँखे फटी की फटी रह जाती है।




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