Saturday, 19 October 2019

राम जी के वनवास और फिर लंका पति रावण के वध का कारण था कुंडली का योग


राम जी को 14 वर्ष का वनवास हुआ था और उनहोंने रावण का वध किया था। रावण की जन्मकुंडली सिंह लग्न की हैं, और कहीं ना कहीं रावण की जन्म कुंडली को तुला लग्न में जन्म लेने का वृतांत भी आया हैं मगर सिंह लग्न की कुंडली का प्रभाव रावण के जीवन में सर्वाधिक रहा हैं।

राम जी की कुंडली का योग:

प्रभु श्री राम की जन्म कुंडली में श्रेष्ठतम गजकेसरी योग, हंस योग, शशक योग, महाबली योग, रूचक योग, मालव्य योग, कुलदीपक योग, कीर्ति योग सहित अनेकों वहां योगों की भरमार हैं और श्री राम की कुंडली में बने योग पर ध्यान दिया जाए तो चंद्रमा और बृहस्पति का एक साथ होना ही जातक धर्म और वीर वेदांत में रूचि लेने वाला होता हैं।

वही बृहस्पति की पंचम विद्या भाव पर अमृत दृष्टि, सप्तम पत्नी भाव पर मार्ग दृष्टि और नवम भाग्य भाव पर अमृत दृष्टि पढ़ रही हैं जिसके फलस्वरूप भगवान राम की कीर्ति और भाग्योदय का शुभारंभ 16वें वर्ष में ही हो गया था और पूर्ण भाग्योदय 25 वर्ष से शुरुआत हुई थी।



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