Thursday, 12 November 2020

एक ऐसा मंदिर जहां फूलों की नहीं चढ़ाई जाती है चप्पलों की माला


भारत में मंदिरों के प्रति आस्था और विश्वास को हर जगह देखा जा सकता हैं। भारत के मंदिर पूरे विश्वभर में अपनी अलग-अलग विशेषता के लिए जाने जाते हैं। सभी लोग मंदिरों का सम्मान करते हैं और मंदिर के अन्दर चप्पल-जूते लेकर नहीं जाते। लेकिन क्या आप कभी सोच सकते हैं की मंदिर में चप्पलों की माला चढ़ाई जाये। हम सोच नहीं सकते लेकिन असल में कर्नाटक के एक मंदिर में फूल और फूलमाला नहीं बल्कि चप्पलों की माला चढ़ाई जाती है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में।


कनार्टक के गुलबर्ग जिले में स्थित भव्य लकम्मा देवी मंदिर में भक्त देवी को खुश करने के लिए फूलों की माला में गुथी चप्पल की माला बांधते हैं। हर साल यहां पर फुटवियर फेस्टिवल आयोजित किया जाता है। जिसमें दूर-दूर से लोग चप्पल चढ़ाने आते है। यह फेस्टिवल हर साल दिवाली के छठे दिन मनाया जाता है।


लोग अपनी मन्नतों को पूरी करने के लिए बाहर एक पेड़ पर चप्पलें टांगते हैं। लोगों का मानना है कि देवी रात के समय उनकी चढ़ाई चप्पलों को पहन कर घूमती है और बुरी शक्तियों से उनकी रक्षा करती है। इससे पहले देवी को खुश करने के लिए यहां पर बैलों की बलि दी जाती थी। जानवरों को मारने पर रोक लगने के बाद से यहां बलि देना बंद हो गया। इसके बाद यहां पर चप्पलों को बाधंने की परंपरा शुरु हो गई।


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