Wednesday, 10 April 2019

WHO की रिपोर्ट, डिलिवरी के वक्त महिलाओं के साथ डॉक्टर्स करते है ऐसा फ्रॉड


माँ बनना हर लड़की का सपना होता है। वह प्रसव के दौरान डॉक्टर्स की बताई हुई हर बात को पत्थर की लकीर समझ कर मानती है क्योंकि उसे लगता है ये उसके बच्चे के लिए सही है। वैसे देखा जाये तो बच्चे के जन्म के वक्त हर मां चाहती है कि उसकी नॉर्मल डिलीवरी हो। लेकिन कई बार क्रिटिकल कंडीनशन होने पर डॉक्टर सीजेरियन की सलाह देते हैं।

WHO की रिपोर्ट:

WHO की इस रिपोर्ट के मुताबिक डिलिवरी के वक्त डॉक्टर्स मरीज से फ्रॉड करते हैं उन्हें सुरक्षा का भरोसा देकर अपना फायदा उठाते है। उन्हें लगता है कि नॉर्मल डिलिवरी करने में ज्यादा समय बर्बाद होता है इसलिए सीजेरियन ऑपरेशन कर दो। यही वजह है कि पिछले दस सालों में सीजेरियन डिलिवरी में दोगुनी बढ़ोत्तरी हुई है।

डॉक्टर्स करते है फ्रॉड:

WHO की रिपोर्ट में कहा गया कि डॉक्टर्स बड़े पैमाने पर ऑक्सीटोसिन नाम की एक दवा का यूज सीजेरियन डिलिवरी के दौरान करते हैं। जो महिलाओं की प्राकृतिक डिलिवरी से बड़ी छेड़छाड़ है। इस दवा का बुरा इफेक्ट महिलाओं की हेल्थ पर पड़ता है।

सीजेरियन डिलीवरी होने के बाद महिला का शरीर ज्यादा कमजोर हो जाता है और नॉर्मल डिलीवरी की बजाए दो गुना खून बहता है। नॉर्मल प्रसव से सिर्फ दर्द होता है लेकिन ऑपरेशन से प्रसव होने के बाद महिला का शरीर अंदर से काफी कमजोर हो जाता है जो जीवनभर की समस्या बन जाती है।



from Fir Post http://bit.ly/2Ksejy1

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