हमारे शास्त्रों में शरद पूर्णिमा की रात पवित्र रात्रि मानी जाती है। लेकिन पूर्णिमा की अपेक्षा इस रात चंद्र बड़ा दिखता है। आयुर्वेद में भी इस रात का विशेष महत्व बताया है। इसीलिए शरद पूर्णिमा की रात कई जगहों पर खीर का वितरण होता है। ये खीर स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती है।
शरद पूर्णिमा की खास मान्यताएं:
# देवी लक्ष्मी, भगवान विष्णु और उनके अवतारों की पूजा के लिए ये तिथि बहुत खास है। इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा भी की जाती है।
# पूजा-पाठ की दृष्टि से महत्वपूर्ण होने की वजह से इस दिन घर में प्रेम से रहना चाहिए। वाद-विवाद न करें। जिन घरों में क्लेश होता है, वहां देवी-देवताओं की कृपा नहीं होती है।
# पूर्णिमा पर सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास दीपक जलाएं और परिक्रमा करें। ध्यान रखें रात में तुलसी को स्पर्श नहीं करना चाहिए।
# द्वापर युग में इस तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों संग रास रचाया था। वृंदावन के निधिवन के संबंध में कहा जाता है कि आज भी यहां श्रीकृष्ण और गोपियां रास रचाती हैं।
# इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा करें। शिवलिंग पर चांदी के लोटे से दूध चढ़ाएं और दीपक जलाकर ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। मंत्र जाप कम से कम 108 बार करें।
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