हाल ही में बिहार विधानसभा चुनाव के साथ अन्य कई राज्यों के उपचुनावों में कांग्रेस की करारी शिकस्त ने एक बार फिर पार्टी के अंदर के रोष को बाहर ला दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने फिर पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। इससे पहले सिब्बल उन 23 नेताओं में से एक थे, जिन्होंने पत्र लिखकर पार्टी में व्यापक सुधार लाने की मांग की थी।
उठे कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल
सिब्बल ने कहा कि वह सार्वजनिक रूप से बोलने के लिए मजबूर हैं, क्योंकि पार्टी के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए पार्टी में कोई मंच नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को चुनावों का प्रबंधन करने के लिए कुशल और वरिष्ठ नेताओं की जरूरत है। उन्होंने यह भी नाखुशी व्यक्त की कि पार्टी के किसी भी वरिष्ठ नेता ने बिहार के नतीजों पर बात नहीं की है।
कांग्रेस विपक्ष के महागठबंधन में सबसे कमजोर कड़ी
कई कांग्रेस नेताओं ने बिहार के नतीजों के बाद अपनी बात रखी है, क्योंकि कांग्रेस को विपक्ष के महागठबंधन में सबसे कमजोर कड़ी के रूप में पाया गया है। कांग्रेस ने राज्य में 70 सीटों पर चुनाव लड़ा, मगर वह महज 19 सीटों पर ही जीत दर्ज कर सकी। कांग्रेस उन उपचुनावों में भी हार गई, जहां उसका भाजपा के साथ सीधा मुकाबला था।
सिब्बल ने कहा कि पार्टी को स्वीकार करना होगा कि वह ढलान पर है और संगठनात्मक पुनर्गठन और मीडिया प्रबंधन से लेकर खुद को मजबूत करने के लिए कई तरीकों को अपनाए जाने की आवश्यकता है।
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